चाह

Prateek Jain's Blog

दुनिया एक मेला हैं,हम इसकी भीड़ का एक हिस्सा
चाहे तो इसकी भीड़ मैं खो जाओ
चाहे तो इससे हटकर दिखलाओ.
चाहे तो इसके इतिहास मैं कही खो जाओ
चाहे तो इतिहास का एक सुनहरा पल बन जाओ.
चाहे तो आगे बढ़कर स्वयं को पहचान लो
चाहे तोह अपनी पहचान भुलाकर
ऐसे ही मिट जाओ .
चाहे तो इसके गर्भ मैं समां जाओ
चाहे तो अपनी माँ की कोख
का क़र्ज़ चूका जाओ.
चाहे तो जीकर भी मर जाओ
चाहे तोह मरकर भी अमर हो जाओ.
यह तुम्हारी चाह हैं
जो चाहो कर वोह कर जाओ.

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About Prateek

I am a geek with views on almost everything.
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